Sunday, November 23, 2014

********वक्त और कलम ******

कलम कही ठहर सी गयी हैं ..

शब्द कही खो से गये हैं ..

वक्त भी ठहरा हुआ सा हैं ...

स्याही भी कही फेली पड़ी हैं ...

 और वह पन्ने इस उम्मीद में...

कि कभी तो वो कलम ...

वापस शब्दों की खोज करते हुए  ....

 फिर से स्याही में डूब कर ....

उन अनछुए पन्नो में.....

जान भर देगी ....

 बस उसी वक्त के लिए ....

रुकी हूँ मैं ....

Wednesday, July 2, 2014

******झूठ और रिश्ते ******

कितने झूठ हैं और

कितने झूठो पर टिका

रखे हैं हमने रिश्ते

हर रिश्ता जो बस एक

झूठ पर टिका

और वो झूठ हर 

रिश्ते का अलग

अलग सा ,न उसका सच हैं

न रिश्ते का सच हैं

फिर भी हर झूठ का

सच पर हर बार का

गढ़ा अस्तितत्व हैं

और उस अस्तित्व पर

टिके हैं न जाने

कितने रिश्ते और

उन रिश्तो को निभाने

के लिए हम फिर

एक झूठ को

सच का आवरण

बना कर फिर बना देते हैं

कभी न ख़तम होने वाला

वही सत्य ,जो जोड़ देता हैं

फिर से दो रिश्तो को

जो जिंदगी के साथ

चलते हैं उम्र भर

और उस झूठ में कई

जिन्दगिया जाती हैं निकल

बस रह जाता हैं तो वो झूठ


और बस वही रिश्ता ....

Saturday, June 28, 2014

****मुझे गुम नहीं होना खुद मैं ****

जाने कहा गुम हूँ मैं ..

लिखती थी ..महसूस करती थी ..

सब कुछ जो घट रहा हैं मेरे आस पास ..

हर एक बात जो मेरे मन पर आकर

चोट कर देती थी और बना देती थी

मुझे किसी का भी रूप और

उस रूप में खुद को पाकर मैं अपने

मन  को उसका बना लेती थी

और लिख डालती थी वो सब जो

वो महसूस कर रहा हैं हर पल

वह आदमी जो आज भी मेरे

आस पास ही हैं और उसकी रोज

की जिंदगी जी रहा हैं लकिन

क्यों आज मैं अनायास ही

नही लिख पा रही कुछ

कुछ तो हैं जहा मैं गुम हूँ

मुझे खुद मैं गुम नहीं होना

मुझे लिखना हैं हर उस आदमी

पर ,उसके मन में चल रहे आक्रोश

को फिर से ,मुझे गुम नहीं होना मुझ में

जो छीन लेता हैं मुझ से मुझी को

और फिर मैं नहीं लिख पाती मेरे

चारो तरफ का शोर क्योंकि

मेरे शोर में ही सिमट जाता हैं

सारा शोर और मैं नहीं सुन पाती

चारो तरफ फेली आवाजे

मुझे गुम नहीं होना खुद मैं


मुझे गुम नहीं होना खुद मैं !

Thursday, April 3, 2014

*****मैं और मेरे अक्षर*****

कोई मेरा हो न हो

ये अक्षर मेरे हैं

और बस ये

कलम मेरी हैं

जो जिंदगी में

 हमेशा-हमेशा

 मेरे साथ

 रहने वाले हैं

और इन्ही में

कयी जीवन और

कई कहानियाँ

 मेरे जीवन से

जुडी रहेंगी

 हमेशा-हमेशा

 के लिए !

*****सच और एक आवरण*****

मुझे पता हैं वह भी जो

कभी तुमने कहा ही नहीं

एक संकोच था या मानो

बस एक आवरण जो तुमने

अपने सच पर चढ़ा रखा था

तुम मेरे पुरे होकर भी मेरे नही थे

मेरा था वो जूठ जो ओढ़ रखा था तुमने

पर जो छिपा होता हैं वो झूठ कहा होता हैं

उसे तो सहज सच कहा जाता हैं

पर वो सच नहीं सिर्फ एक आवरण हैं

जो तुम्हे, तुम्हे होने से रोकता हैं

और तुम उस आवरण में 

हमेशा के लिए केद हो चुके हो 

अब वही आवरण मेरा

भी सच बन चूका हैं 

और इस जीवन का भी

और फिर एक बार सच पर

झूठ का आवरण


चढ़ चूका हैं 

हमेशा हमेशा के लिए !

Tuesday, January 7, 2014

*****तुम्हारा सच *****

तुम हर बार 

सच को भी 

सत्यापित करते हो

मेरे सत्य पर और

मैं ये सोचकर कि 

तुम्हारी आदत हैं

मेरी हर बात पर

बात को नहीं 

खुद को मुझ पर

स्थापित करने की 

और मैं ये जानती हूँ

इसलिए उसे वही 

अलापविराम दे 

देती हूँ क्योंकि

मुझे पता है तुम्हारा

सच मेरे सामने 

और चार जुड़े लोगो

के सामने हमेशा 

अलग होता है 

सच तुम्हारा सच

कितना अलग हैं 

मेरे सच से ।

Saturday, January 4, 2014

*******सिर्फ मैं *******


कुछ तो तुममे खास नहीं ,

कुछ भी तो नहीं,

बस ख़ास तो मेरी आँखे

जो तुम्हे खूबसूरत

बनाती है हर बार

मेरा कोरा मन जो

तुम्हे साफ़ देखता है

मेरा दिमाग जो

तुम्हे समझदार समझता है

बस मै ही तो हूँ तुम मे

तुम कहा हो ,

तुम कभी थे ही नहीं

न कल न आज

वो तो बस मैं ही थी

जिसे तुम नजर आये

पर अब मुझे तुम नजर नहीं आते

तुम में छिपी अच्छी सी मैं

और मेरा मन नजर आता है

जो हमेशा से साफ़ था तुम्हारे लिए

सच ,कुछ ख़ास नहीं तुममे

कुछ भी तो नहीं ।