Thursday, April 3, 2014

*****मैं और मेरे अक्षर*****

कोई मेरा हो न हो

ये अक्षर मेरे हैं

और बस ये

कलम मेरी हैं

जो जिंदगी में

 हमेशा-हमेशा

 मेरे साथ

 रहने वाले हैं

और इन्ही में

कयी जीवन और

कई कहानियाँ

 मेरे जीवन से

जुडी रहेंगी

 हमेशा-हमेशा

 के लिए !

*****सच और एक आवरण*****

मुझे पता हैं वह भी जो

कभी तुमने कहा ही नहीं

एक संकोच था या मानो

बस एक आवरण जो तुमने

अपने सच पर चढ़ा रखा था

तुम मेरे पुरे होकर भी मेरे नही थे

मेरा था वो जूठ जो ओढ़ रखा था तुमने

पर जो छिपा होता हैं वो झूठ कहा होता हैं

उसे तो सहज सच कहा जाता हैं

पर वो सच नहीं सिर्फ एक आवरण हैं

जो तुम्हे, तुम्हे होने से रोकता हैं

और तुम उस आवरण में 

हमेशा के लिए केद हो चुके हो 

अब वही आवरण मेरा

भी सच बन चूका हैं 

और इस जीवन का भी

और फिर एक बार सच पर

झूठ का आवरण


चढ़ चूका हैं 

हमेशा हमेशा के लिए !