Monday, April 27, 2015

*****पानी और आसमाँ ******

जहाँ दूर पानी
 से आसमाँ 
मिल रहा था ....
बस वही एक
जगह मुझे
बहुत पसंद हैं .....
जिस तरह वह
पानी और आसमाँ
अलग अलग
होते हुए भी एक
दिखाई देते हैं ....
बस वही मुझे
तुम और मैं
खड़े दीखाई
देते हैं ....
न पानी डूबा
पाता आसमाँ को ..
और न आसमाँ
समेट पाता
पानी को..
पर दोनों
निरंतर साथ हैं .
हमेशा
एक दुसरे के लिए..
उसी तरह
जेसे तुम और मैं
साथ हैं
एक दुसरे
के लिए .........

 

Saturday, April 4, 2015

तुमसे दुरी ...और मैं.....

मैं नहीं चाहती ..
 तुमसे दूर जाना ...
पर सोचती हूँ ..
मेरे दूर जाने से शायद ..
तुम्हारी जिंदगी ज्यादा
सुलझ जायेगी ...
और  सोच पाओगे
वो सब जो मेरे रहने से
तुम नहीं सोच सकते ...
इसलिए मुझे जाना होगा ..
दूर ..
बहुत दूर ..
मुझे पता हैं मैं गलत हूँ
पर हर गलत ..
गलत नहीं होता ..
सही भी होता हैं...
और उस सही के लिए
हर बार जाना होता हैं..
दूर ...
अपनों से ...
कि जो अपना हैं
फिर से वो समझ सके ..
दूर होने का सबब...
जिंदगी आसान नहीं हैं ...
पर इसे इतना उलझायो मत ..
सुलझ जाने दो ...
शायद मेरे जाने से
सुलझ जाए जो तुम
नहीं सुलझा पाए ...
हाँ प्रेम मुझे बहुत हैं
तुमसे ...
पर हर प्रेम का
मतलब पाना नहीं होता ..
खोना भी होता हैं ...
इसलिए बस अब
कोई सवाल नहीं ...
क्योंकि जवाब
नहीं हैं अब मेरे पास ...
बस ये समझना
कि हर जवाब में
तुम्हारे लिए प्रेम
ही हैं ...
वो भी अधाह..
और शायद तुम भी
समझ पाते
उस प्रेम को ..
जिसे मैंने समझा ......
 

Thursday, April 2, 2015

सागर किनारा ...वो शाम ....तुम और मैं......

तुम्हारे साथ
बीती वो शाम ...
याद हैं मुझे ..
वो सागर किनारा
बस तुम और मैं....
दूर तक कोई नहीं था ...
उस रेत में दोनों ने
सपने देखे थे ...
तुम्हे .. वो गगन चुम्बी इमारत
दीखाई दी ,जिसमें रहने का
सपना तुम्हारा था ....
और मुझे वो एक सागर किनारा ..
जहाँ छोटा सा घर ही
मेरा सपना था....
दोनों के सपने अलग थे ..
तुम्हे उचाई पर पहुँचना था ..
और मुझे वो सागर की गहराई
सुखुद लगी ...
बस यही अंतर था ..
तुम में और मुझ मैं....
फिर तुम अपने रास्ते
 चल दिए ..
और मैं .....
अपनी मंजिल कि और ...
पर ....
हाँ वो पल बेहद खूबसूरत था
और वो शाम भी ..वो लहरे ..
वो रेत ..और दूर तक
 एक सन्नाटे में  शोर जो
 सिर्फ पानी का था ...
उस शोर में तुमने और मैंने
अपने अपने सुख दुःख सब गढ़े थे ..
हाँ तुम मुझे अच्छे लगे थे ...
पर उससे भी ज्यादा था
 वो खूबसूरत पल...
जहाँ मुझे खुद के होने का अहसास
तुमसे ज्यादा था ....और आज भी
वो अहसास मेरे साथ हैं ...
तुमसे ज्यादा ...खुद के होने का ..
इसलिए ...मुझे पल को सहेजने की
आदत हैं ....क्योंकि मुझे पता हैं ..
पल ही हैं
 जो खूबसूरत होते हैं ...