Monday, April 27, 2015

*****पानी और आसमाँ ******

जहाँ दूर पानी
 से आसमाँ 
मिल रहा था ....
बस वही एक
जगह मुझे
बहुत पसंद हैं .....
जिस तरह वह
पानी और आसमाँ
अलग अलग
होते हुए भी एक
दिखाई देते हैं ....
बस वही मुझे
तुम और मैं
खड़े दीखाई
देते हैं ....
न पानी डूबा
पाता आसमाँ को ..
और न आसमाँ
समेट पाता
पानी को..
पर दोनों
निरंतर साथ हैं .
हमेशा
एक दुसरे के लिए..
उसी तरह
जेसे तुम और मैं
साथ हैं
एक दुसरे
के लिए .........

 

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