Tuesday, January 7, 2014

*****तुम्हारा सच *****

तुम हर बार 

सच को भी 

सत्यापित करते हो

मेरे सत्य पर और

मैं ये सोचकर कि 

तुम्हारी आदत हैं

मेरी हर बात पर

बात को नहीं 

खुद को मुझ पर

स्थापित करने की 

और मैं ये जानती हूँ

इसलिए उसे वही 

अलापविराम दे 

देती हूँ क्योंकि

मुझे पता है तुम्हारा

सच मेरे सामने 

और चार जुड़े लोगो

के सामने हमेशा 

अलग होता है 

सच तुम्हारा सच

कितना अलग हैं 

मेरे सच से ।

Saturday, January 4, 2014

*******सिर्फ मैं *******


कुछ तो तुममे खास नहीं ,

कुछ भी तो नहीं,

बस ख़ास तो मेरी आँखे

जो तुम्हे खूबसूरत

बनाती है हर बार

मेरा कोरा मन जो

तुम्हे साफ़ देखता है

मेरा दिमाग जो

तुम्हे समझदार समझता है

बस मै ही तो हूँ तुम मे

तुम कहा हो ,

तुम कभी थे ही नहीं

न कल न आज

वो तो बस मैं ही थी

जिसे तुम नजर आये

पर अब मुझे तुम नजर नहीं आते

तुम में छिपी अच्छी सी मैं

और मेरा मन नजर आता है

जो हमेशा से साफ़ था तुम्हारे लिए

सच ,कुछ ख़ास नहीं तुममे

कुछ भी तो नहीं ।