Wednesday, September 25, 2013

****** शर्मिंदगी******

शर्मिंदगी तो कभी थी ही नहीं

हम अन्दर से एक लाश बने रहे

अपने कर्मो पर जताते रहे ,ओढ़ते रहे

एक कवच और छुपाते रहे

अपने गुनाह, करतूतों को

और जिस पर पहना दिया एक

कफ़न संसकृति का और

फिर बदल दिया एक झूठ

एक सच में जो कभी

सच था ही नहीं और

आज तक हम नहीं

होते शर्मिंदा उस पर

क्योंकि वह झूठ कभी

झूठ लगा ही नहीं

अब तू भी शर्मिंदा होना

छोड़ दे क्योंकि यहाँ

अब कोई बंदा बचा

ही नहीं जो फेक सके

उन लिवाजो ,पराम्परायो कों

जिसे तेरे जेसो ने बहुत पहले

बनाया था झूठ का सच

 जो अभी तक मिटा ही नहीं

चल दोस्त जी ले अपनी

दुनिया अपने हिसाब से

क्योंकि इस जहाँ में तेरे

जेसा और कोई बना ही नहीं ।

****मन और रंग ****

ये मन तू रंगों की तरह ही तो है

बदलते हुए रंगों में ढूंढता और

तलाशता हुआ किसी को

एक छोर से दुसरे तक

बस देखता अपनी आँखों से

और समा लेता सभी रंगों

को अपने आप में

कुछ वक्त ,दिन और साल

इन रंगों में बदलते जाते

और फिर शुन्य हो जाता

तू भी मिलकर इनके साथ

फिर शून्य से आगे बढ़कर

बदल देता तस्वीर को

और एक रंग में मिलकर

बदल जाते तेरे रंग भी

ये मन सच तू ही तो है

इन रंगों जेसा और

बदलता रहता ,कब

रह पाता एक जेसा

कही भी ,कभी भी ।

Tuesday, September 17, 2013

*****तुम्हारी याद****

ऐसे ही तुम्हारी याद
चली आती हैं
वो न समय देखती हैं
न पहर ,न दिन देखती
न रात ,बस तुम्हे
अपने पास पाना
चाहती हें
तुम्हे अपनी गोद
में सुलाकर वही
तुम्हारे चहेरे की
शीतलता निहारते
हुए मन शांत
होना चाहता हैं
तुम्हारे बालो में
वो हाथ घुमाकर
बस अपनी ख़ुशी
ढूंढती मेरी आँखे
जो बंद हो जाती हैं
असहय ही और
बस यही कहना
चाहती हें
बार बार कि
बस अब चले
आयो तुम कि
अब तुम्हारी
यादो में जीना
मुश्किल सा लगता हें ....

Thursday, August 29, 2013

******आंसू और में *****

बड़ा अजीब रिश्ता है

इनका मुझ से

उसके चहरे की मायूसी देख

ये गिर जाते अपने आप

मुझसे पूछे बिना

उसी के सुख दुख में ही

अपना जहाँ देख लेते है

 उसके  हर्द्य से कोई आवाज

मेरे हर्दये तक पहुची हो जेसे

और वही आवाज बनकर

ढलक जाते मेरे नैनो से

बस एक अजीब सा रिश्ता

बन जाता है इनका

और मेरा जो

टूट नही पाता

 केसे भी !

Friday, August 16, 2013

***कविता और औरत***

बहुत आसन है तुम्हारे लिए

एक औरत पर कविता लिखना

और उतना ही मुश्किल

मेरे लिए उसको पढना

और हर बार उस अक्स

को खुद में महसूस करना ।

बहुत आसन है तुम्हारे लिए

तस्वीरे लगा कर

उसके दर्द को महसूस कराना

उतना ही मुश्किल मेरे

लिए उसको देख पाना ।

बहुत आसान है तुम्हारे लिए

उससे जुडी हर बात

को लिख जाना।

उतना ही मुश्किल मेरे लिए

उसे हर बार पढ़कर

भूल जाना।

मैं दर्द को महसूस

करती हू खुद में

और तुम लिखते हों

औरत पर कविता

सिर्फ  अपने पन्नों में ।

Tuesday, August 13, 2013

****अधूरी कहानी****

कितनी ही कहानी
अधूरी सी पड़ी हुई
मिलते नहीं शब्द
उसे पूरा करने को
बस ठहर जाती वो
बीच में कही
और उलझ जाती में
उनको पूरा करने को
कुछ तो है अनकहा
अधमरा सा उनमे
जो दबा है समय से
जो नहीं आता सामने
और में फिर हार कर
जुट जाती फिर से
नई कहानी में रोज
उसे वही छोड़कर
बस जिंदगी की
वही कहानी
हम ढूढ़ते रहते
नई जिंदगी
तराशते रहते
पर भूल जाते उन
अधूरी कहानियो को
जो पूरी नहीं हुई
पर मुझे विशवास है
वो पूरी होगी जरुर
एक दिन और
मैं फिर उनपर
लौट आऊँगी
पर जब तक
रोज एक
नयी कहानी में
ढूंढ़ना
वही पुरानी
अधूरी के पुरे
होने तक......

Monday, August 12, 2013

*****थोड़े से तुम थोड़ी सी मैं*****


जितने पन्ने
उतनी कहानिया
जितनी कहानिया
उतनी जिन्दिगिया
जितनी जिन्दगी
उतने लोग
जितने लोग
उतनी बाते
जितनी बाते
उतना तुम और मैं
जितनी तुम में मैं
उतना मेरा प्यार
और जितने मुझ में तुम
 उतने मेरे विचार
जितने मेरे विचार
उतने फिर से पन्ने
और फिर से
 एक
नई कहानी
नई जिंदगी
और
थोड़े से तुम मैं
नई सी वही
मैं .....

Tuesday, August 6, 2013

****आग है ये बेटिया****

आग है ये बेटिया

और बस जलना ही नहीं

जलाना भी जानती है

समय के साथ लड़ती रही

सहती रही हर सितम पर

अब देखती है

अपना ही वजूद जो

खो दिया था कई बार

और हर बार बस

उसी वजूद को ढूंढती

अपने इन्ही खून मै

उन्ही को आग बना देना

चाहती है जों जला दे

अपने जलने के साथ

सब कुछ उसी आग में

ये वही है जो सीने

मे चिन्गारी दबाये थी

काफी समय से

बस आज वों धहकी है

अपनी इन्ही बेटियों

मे शोला बनकर

फिर से जलाने के लिए

जो जला नही था बरसो से.....

****शरीर के सौदे****

****शरीर के सौदे****

शरीर के सौदे वो हर रॊज करते है
और भरते है अपने घाँव
लेकिन भूल जाते है कि शरीर क़ी
रुमानियत से नहीं भरा करते घाँव
वों भरा करते है किसी के प्रेम से
किसी के स्पर्श से
पर नहीं समझा करते बस कहते है
कि नही आया मुझे प्रेम करना
किसी को भुलाना माफ़ करना
और हर बार अनेक घाँव
भर लाते है उसी शरीर पर
और कोशिश करते हर घाँव
मिटाने की उसी शरीर का
सौदा कर ब़ार ब़ार
लकिन भूल जाते वो
कि शरीर के सौदे नही हुआ करते
घाँव भरा करते सिर्फ किसी के प्रेम से...


Monday, August 5, 2013

*******मेरे शब्द और रंग *******

*******मेरे शब्द और रंग *******
 अभी नही आता मुझे
शब्दों को रंगों में ढालना
अभी तो मुझे अपने
इन्ही काले शब्दों से प्रेम है
मुझे उनको संजोना नही आता
सीखाया था तुमने कयी बार
और कहा था की चाँदनी अधूरी
है चाँद के बिना
पर मुझे वो काला आसमान और
उसमे सिर्फ सफ़ेद चाँद ही नजर आया
इन दो रंगों से मुझे बस बहेद प्यार है
सफ़ेद और उस पर उभरता काला रंग
मैं नही समझ पायी रंगों को
और नही ढाल पायी रंग उसमे
जेसे तुमने कहे थे मुझे
मुझे बस ऐसे ही अछे लगते है
ये शब्द
जो समेट लेते है मुझे हर बार
अपना बना कर
कोई रंग नही इनका
जो मे इनकी रंगत में खो जाऊ
बस मुझे ऐसे ही शब्द चाहीये
मेरी जिंदगीमें
मेरी जिंदगी की तरह .........

******************** चोटो के निशान *******************

******************** चोटो के निशान *******************

उन सभी चोटों के निशान
बाकी है उसी शरीर पर
वो लाल नीले पढ़ रहे शरीर पर
तुम्हारी बेरहमी बता रहे मुझे
न जाने तुम इंसानियत भी भुला बेठे
वो कयी बार बस मै ही मै नही रही
माना वो घाव भर दिए वक्त ने सारे
पर आज भी एक घाव कुरेद देता है
उसी शरीर को  जब वहा कोई निशान देखती हू
बस याद आ जाता है तुमारा वो प्यार
जो तुम्हारे हाथो ने बया किया था मुझ पर
जाने कितनी बार सिहरी हु मैं
जाने कितनी बार मेरे न होने का अहसास हुआ है मुझे
तुम जानते हो अपने ही वजूद न होने का
अहसास क्या होता है
जिस दिन जान पायोगे उस अहसास को
समझ आ जायेगे वो अनकही चोटे भी तुम्हे
पर मेरे लिए अभी वो निशान बाक़ी है मुझमे
जाने क्यों पर उन चोटों के निशा बाकि है
मुझ मै !

*****शादी और एक औरत*****

*****शादी और एक औरत*****

शादी एक ऐसा स्वामित्व है एक औरत के लिए
जों बाँध देता है उसे सिर्फ एक ही रिश्ते मे
और वह नही रोक पाती अपने आपको ये
बताने से भी कि अभी अभी शादी हुई हे मेरी
कई बार बस उसमे ही खों जाती है वो
बस रम जाती ही अपने पति और उसके
नए जीवन मे,वही अछा सा काल प्रतीत होता उसे
इस काल मे वो भुलती है सारे रिश्ते नाते
बस एक ही जाल नजर आता है उसे
करती रहती निर्वाह जीवन बस अर्धगानिं बनकर
भूलती रही अपने से किये कुछ वादे
जिसे वास्तव मे वो करना चाहती थी
सब कुछ किसी और के लिये गवा दिया उसने
जब भी किसी से मिला करती वो चूड़ी से भरे हाथ
माँग का सिन्दूर ओर उसकी आँखों से झलकता प्यार
हर बार उसके नयेपन का आभास करा जाता
बस वही कुछ नए दिन और वो खो गई
उन रस्मों रिवाजों ओर समाज के जंजाल मे
जहाँ के लिए वो कभी बनी थी ही नही
और हो गई किसी की परिनीता
हमेशा हमेशा के लिए.....

***********लेखन और विचार ***********

***********लेखन और विचार ***********

बड़े अजीब सा होता है ये प्रेम लिखने का
कही भी किसी भी वक्त चले आते है विचार
और कहते है बस अभी तू उतार दे मुझे
उन कोरे पन्नो  पर ,बह जाने दे मुझे
अपनी कलम से नीली स्याही बनकर
नींद से जगा जाते है मुझे हर रोज
कहते है मुझे उस समय ही उतार देने को
और मैं समझ नही पाती उन्हे
बस बह जाती हू उनके साथ ही
उठा लेती हू कलम हाथो में
और बस लिख देती हू जो
मुझसे ये कहना चाहते है
कभी कभी इनकी चाहत में
इतना खो जाती हू की नही होती
आहट किसे के आने जाने  की
किसी की आवाजो की
बस उनसे ऐसा जुड़ाव है जो
रुक नही पाता और मैं
थम नही पाती बस बह जाती हू
इनके साथ इन्ही की होकर
हमेशा के लिए ....

Sunday, August 4, 2013

******** दो तरह के लोग*******

  ********  दो तरह के लोग*******

दो तरह के लोग देखे मैंने

करते है बाते  यहाँ धर्म निरपेक्षता की

और जोहते है धर्म अपना अपने घर की चार दीवारो मै

जो कहते है जयोतिषशास्त्र है बुरा

और भटका करते है उन्ही की दुकानों पर

जो कहते है हम समाजसेवी है

पर अपनों की सेवा ही नही कर पाते

कहते है औरत पुरूष समान

और है औरत महान

लकिन रोंध देते है रात दिन

अपने घर ओर

समाज की औरतों को अपनी बातो

कभी हाथों तो कभी बेशरम निहगॊ से

कहते है प्यार से बड़ा कुछ नही जिंदगी में

और रखते है नफरत दुनिया जहान की दिल मै

इन दो तरह के लोगो मै, दो तरह की बातो मै

दो तरह की जिंदगी देखते देखते दम खुट चला है मेरा

और डर है की एक दिन मै भी दो तरह की

न बन कर रह जाऊ कही ....

...

जिंदगी..एक कैनवास ..एक पेड की डाली ..एक पत्ती..मेरा प्यार ..और तुम

जरुरी नही की हर बार
आवाज ही दूँ तुम्हे ,

बस कभी कभी खुद मे
खो जाना चाहती हू मै

इसका मतलब ये नही
की प्रेम नही तुमसे

बस अनकहे शब्दों को समझ लेना तुम
हमेशा की तरह

गर न समझ पाए कभी तो
ये न समझना की नाराजगी थी कोई

बस खुद को तलाशने को
खो जाना चाहती हू मै

हमेशा हमेशा के लिए ,
बस तुम्हारी ही तुम्हारी

         मै ....