Sunday, August 4, 2013

******** दो तरह के लोग*******

  ********  दो तरह के लोग*******

दो तरह के लोग देखे मैंने

करते है बाते  यहाँ धर्म निरपेक्षता की

और जोहते है धर्म अपना अपने घर की चार दीवारो मै

जो कहते है जयोतिषशास्त्र है बुरा

और भटका करते है उन्ही की दुकानों पर

जो कहते है हम समाजसेवी है

पर अपनों की सेवा ही नही कर पाते

कहते है औरत पुरूष समान

और है औरत महान

लकिन रोंध देते है रात दिन

अपने घर ओर

समाज की औरतों को अपनी बातो

कभी हाथों तो कभी बेशरम निहगॊ से

कहते है प्यार से बड़ा कुछ नही जिंदगी में

और रखते है नफरत दुनिया जहान की दिल मै

इन दो तरह के लोगो मै, दो तरह की बातो मै

दो तरह की जिंदगी देखते देखते दम खुट चला है मेरा

और डर है की एक दिन मै भी दो तरह की

न बन कर रह जाऊ कही ....

...

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