Monday, August 5, 2013

***********लेखन और विचार ***********

***********लेखन और विचार ***********

बड़े अजीब सा होता है ये प्रेम लिखने का
कही भी किसी भी वक्त चले आते है विचार
और कहते है बस अभी तू उतार दे मुझे
उन कोरे पन्नो  पर ,बह जाने दे मुझे
अपनी कलम से नीली स्याही बनकर
नींद से जगा जाते है मुझे हर रोज
कहते है मुझे उस समय ही उतार देने को
और मैं समझ नही पाती उन्हे
बस बह जाती हू उनके साथ ही
उठा लेती हू कलम हाथो में
और बस लिख देती हू जो
मुझसे ये कहना चाहते है
कभी कभी इनकी चाहत में
इतना खो जाती हू की नही होती
आहट किसे के आने जाने  की
किसी की आवाजो की
बस उनसे ऐसा जुड़ाव है जो
रुक नही पाता और मैं
थम नही पाती बस बह जाती हू
इनके साथ इन्ही की होकर
हमेशा के लिए ....

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