बड़ा अजीब रिश्ता है
इनका मुझ से
उसके चहरे की मायूसी देख
ये गिर जाते अपने आप
मुझसे पूछे बिना
उसी के सुख दुख में ही
अपना जहाँ देख लेते है
उसके हर्द्य से कोई आवाज
मेरे हर्दये तक पहुची हो जेसे
और वही आवाज बनकर
ढलक जाते मेरे नैनो से
बस एक अजीब सा रिश्ता
बन जाता है इनका
और मेरा जो
टूट नही पाता
केसे भी !
इनका मुझ से
उसके चहरे की मायूसी देख
ये गिर जाते अपने आप
मुझसे पूछे बिना
उसी के सुख दुख में ही
अपना जहाँ देख लेते है
उसके हर्द्य से कोई आवाज
मेरे हर्दये तक पहुची हो जेसे
और वही आवाज बनकर
ढलक जाते मेरे नैनो से
बस एक अजीब सा रिश्ता
बन जाता है इनका
और मेरा जो
टूट नही पाता
केसे भी !
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