Monday, August 5, 2013

******************** चोटो के निशान *******************

******************** चोटो के निशान *******************

उन सभी चोटों के निशान
बाकी है उसी शरीर पर
वो लाल नीले पढ़ रहे शरीर पर
तुम्हारी बेरहमी बता रहे मुझे
न जाने तुम इंसानियत भी भुला बेठे
वो कयी बार बस मै ही मै नही रही
माना वो घाव भर दिए वक्त ने सारे
पर आज भी एक घाव कुरेद देता है
उसी शरीर को  जब वहा कोई निशान देखती हू
बस याद आ जाता है तुमारा वो प्यार
जो तुम्हारे हाथो ने बया किया था मुझ पर
जाने कितनी बार सिहरी हु मैं
जाने कितनी बार मेरे न होने का अहसास हुआ है मुझे
तुम जानते हो अपने ही वजूद न होने का
अहसास क्या होता है
जिस दिन जान पायोगे उस अहसास को
समझ आ जायेगे वो अनकही चोटे भी तुम्हे
पर मेरे लिए अभी वो निशान बाक़ी है मुझमे
जाने क्यों पर उन चोटों के निशा बाकि है
मुझ मै !

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