कितनी ही कहानी
अधूरी सी पड़ी हुई
मिलते नहीं शब्द
उसे पूरा करने को
बस ठहर जाती वो
बीच में कही
और उलझ जाती में
उनको पूरा करने को
कुछ तो है अनकहा
अधमरा सा उनमे
जो दबा है समय से
जो नहीं आता सामने
और में फिर हार कर
जुट जाती फिर से
नई कहानी में रोज
उसे वही छोड़कर
बस जिंदगी की
वही कहानी
हम ढूढ़ते रहते
नई जिंदगी
तराशते रहते
पर भूल जाते उन
अधूरी कहानियो को
जो पूरी नहीं हुई
पर मुझे विशवास है
वो पूरी होगी जरुर
एक दिन और
मैं फिर उनपर
लौट आऊँगी
पर जब तक
रोज एक
नयी कहानी में
ढूंढ़ना
वही पुरानी
अधूरी के पुरे
होने तक......
अधूरी सी पड़ी हुई
मिलते नहीं शब्द
उसे पूरा करने को
बस ठहर जाती वो
बीच में कही
और उलझ जाती में
उनको पूरा करने को
कुछ तो है अनकहा
अधमरा सा उनमे
जो दबा है समय से
जो नहीं आता सामने
और में फिर हार कर
जुट जाती फिर से
नई कहानी में रोज
उसे वही छोड़कर
बस जिंदगी की
वही कहानी
हम ढूढ़ते रहते
नई जिंदगी
तराशते रहते
पर भूल जाते उन
अधूरी कहानियो को
जो पूरी नहीं हुई
पर मुझे विशवास है
वो पूरी होगी जरुर
एक दिन और
मैं फिर उनपर
लौट आऊँगी
पर जब तक
रोज एक
नयी कहानी में
ढूंढ़ना
वही पुरानी
अधूरी के पुरे
होने तक......
No comments:
Post a Comment