Tuesday, August 6, 2013

****आग है ये बेटिया****

आग है ये बेटिया

और बस जलना ही नहीं

जलाना भी जानती है

समय के साथ लड़ती रही

सहती रही हर सितम पर

अब देखती है

अपना ही वजूद जो

खो दिया था कई बार

और हर बार बस

उसी वजूद को ढूंढती

अपने इन्ही खून मै

उन्ही को आग बना देना

चाहती है जों जला दे

अपने जलने के साथ

सब कुछ उसी आग में

ये वही है जो सीने

मे चिन्गारी दबाये थी

काफी समय से

बस आज वों धहकी है

अपनी इन्ही बेटियों

मे शोला बनकर

फिर से जलाने के लिए

जो जला नही था बरसो से.....

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