Friday, August 16, 2013

***कविता और औरत***

बहुत आसन है तुम्हारे लिए

एक औरत पर कविता लिखना

और उतना ही मुश्किल

मेरे लिए उसको पढना

और हर बार उस अक्स

को खुद में महसूस करना ।

बहुत आसन है तुम्हारे लिए

तस्वीरे लगा कर

उसके दर्द को महसूस कराना

उतना ही मुश्किल मेरे

लिए उसको देख पाना ।

बहुत आसान है तुम्हारे लिए

उससे जुडी हर बात

को लिख जाना।

उतना ही मुश्किल मेरे लिए

उसे हर बार पढ़कर

भूल जाना।

मैं दर्द को महसूस

करती हू खुद में

और तुम लिखते हों

औरत पर कविता

सिर्फ  अपने पन्नों में ।

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