कलम कही ठहर सी गयी हैं ..
शब्द कही खो से गये हैं ..
वक्त भी ठहरा हुआ सा हैं ...
स्याही भी कही फेली पड़ी हैं ...
और वह पन्ने इस उम्मीद में...
कि कभी तो वो कलम ...
वापस शब्दों की खोज करते हुए ....
फिर से स्याही में डूब कर ....
उन अनछुए पन्नो में.....
जान भर देगी ....
बस उसी वक्त के लिए ....
रुकी हूँ मैं ....
शब्द कही खो से गये हैं ..
वक्त भी ठहरा हुआ सा हैं ...
स्याही भी कही फेली पड़ी हैं ...
और वह पन्ने इस उम्मीद में...
कि कभी तो वो कलम ...
वापस शब्दों की खोज करते हुए ....
फिर से स्याही में डूब कर ....
उन अनछुए पन्नो में.....
जान भर देगी ....
बस उसी वक्त के लिए ....
रुकी हूँ मैं ....