Saturday, April 4, 2015

तुमसे दुरी ...और मैं.....

मैं नहीं चाहती ..
 तुमसे दूर जाना ...
पर सोचती हूँ ..
मेरे दूर जाने से शायद ..
तुम्हारी जिंदगी ज्यादा
सुलझ जायेगी ...
और  सोच पाओगे
वो सब जो मेरे रहने से
तुम नहीं सोच सकते ...
इसलिए मुझे जाना होगा ..
दूर ..
बहुत दूर ..
मुझे पता हैं मैं गलत हूँ
पर हर गलत ..
गलत नहीं होता ..
सही भी होता हैं...
और उस सही के लिए
हर बार जाना होता हैं..
दूर ...
अपनों से ...
कि जो अपना हैं
फिर से वो समझ सके ..
दूर होने का सबब...
जिंदगी आसान नहीं हैं ...
पर इसे इतना उलझायो मत ..
सुलझ जाने दो ...
शायद मेरे जाने से
सुलझ जाए जो तुम
नहीं सुलझा पाए ...
हाँ प्रेम मुझे बहुत हैं
तुमसे ...
पर हर प्रेम का
मतलब पाना नहीं होता ..
खोना भी होता हैं ...
इसलिए बस अब
कोई सवाल नहीं ...
क्योंकि जवाब
नहीं हैं अब मेरे पास ...
बस ये समझना
कि हर जवाब में
तुम्हारे लिए प्रेम
ही हैं ...
वो भी अधाह..
और शायद तुम भी
समझ पाते
उस प्रेम को ..
जिसे मैंने समझा ......
 

No comments:

Post a Comment