वो गगन में उड़ने वाली लड़की
दुनिया
देखनी हैं उसे...
बंधकर नहीं रहना था ....
पर तुमने ये कभी समझा ही नही ...
और बाँध दिया
उसे ....
वो बंधना नहीं चाहती ....
एक पंछी की तरह हैं ...
जो आकाश में उड़ना पसंद
करते हैं....
जब चाहो जिस डाल पर बेठो ..
और जब चाहो उड़ जायो ....
तुम उसे आकाश दो
...
उसके साथ उड़ो....
उसकी कल्पनाये ..
जो बहुत ही ज्यादा हैं...
और तुम्हारी सोच से
भी परे हैं....
उन्हें पंख दो....
क्योंकि तुम जितना उसको पंख दोगे....
आजाद करोगे
...वो उतना तुम्हारे आस पास खुद को पायेगी ......
पर काश तुमने ये समझा होता ...
तुम्हे
तो हर पंछी को केद करना हैं ...अपने पिजरे में....
वो पिजरा सोने का भी हो...
पर
पिंजरा हैं उसके लिए ....
वो सिर्फ उड़ना जानती हैं ...
चहचहाना जानती हैं....
उसे
आकाश चाहीये ...
तुम्हारी बाहे आकाश की तरह होनी चाहीये....
और उसमें बहुत सारी जगह
....
जिससे वो जब चाहे उड़ जाए ....
मुठठी में केद नहीं कर पायोगे उसे.....
इसलिए
उम्मीद भी छोड़ दो.....
वो सिर्फ आजाद रहना जानती हैं....
उसके अपार आकाश मैं ...
अपनी
ढेरो कल्पनायो के साथ....
तुम्हारे साथ रहने की उनमें से सिर्फ एक कल्पना
हैं....
उसकी जिंदगी नही ....इसलिए ...
उन अपार कल्पनायो को सजोये रखना ही उसकी जिंदगी
हैं ...
और तुम एक सूखे पत्ते या तिनके की तरह हो ....
जो मजबूत हुआ तो उसके घर
बनाने में काम आ जाएगा ...
और जिंदगी भर वो घर सजोकर रखेगी ...
पर अगर मजबूत न हुआ
..
तो वो कभी भी उसकी चोंच से गिर जाएगा ....
और वो नए तिनके की तलाश मैं फिर से चल
देगी ......
क्योंकि उसका घर एक-एक मजबूत तिनके से बना हैं ...
.जिसमें वो शाम ढले
आना पसंद करती हैं .....:)
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