Friday, September 1, 2017

*****अंत और कल्पनाये *****

मेरी कविताएं भी
मेरी ही तरह थी ..
बस हमेशा
अंत खोजती रही..
क्योंकि सभी का
अंत होता हैं..
बिना अंत के कविताये
पूरी नही होती..
पर शायद अंत होता हैं
इसलिए मेरी कविताओं
के लिए अंत
खोजना मुश्किल था ..
हर बार लिखती रही ..
बस अंत नही कर पाई..
जाने कितनी कल्पनाये
इन कविताओं में
आज भी
अंत खोजती हैं ..
पर मुझे पता हैं
इनको अंत नही मिलेगा ..
क्योंकि अंत होने से
कल्पनाये मर जाती हैं ..
और मेरी कल्पनाये
मरना नही चाहती..
जीना चाहती हैं ..
हर बार ..इसलिए 
अब इन कविताओं
को लिखकर ...
इनका अंत खोजना छोड़ दिया हैं ..
क्योंकि
ये मेरी कल्पनाये हैं ..
जिनका अंत
मुमकिन नही हैं ...

:)

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