कुछ तो तुममे खास नहीं ,
कुछ भी तो नहीं,
बस ख़ास तो मेरी आँखे
जो तुम्हे खूबसूरत
बनाती है हर बार
मेरा कोरा मन जो
तुम्हे साफ़ देखता है
मेरा दिमाग जो
तुम्हे समझदार समझता है
बस मै ही तो हूँ तुम मे
तुम कहा हो ,
तुम कभी थे ही नहीं
न कल न आज
वो तो बस मैं ही थी
जिसे तुम नजर आये
पर अब मुझे तुम नजर नहीं आते
तुम में छिपी अच्छी सी मैं
और मेरा मन नजर आता है
जो हमेशा से साफ़ था तुम्हारे लिए
सच ,कुछ ख़ास नहीं तुममे
कुछ भी तो नहीं ।
I loved your poem... God Bless you Dear
ReplyDeleteBeautiful words....
ReplyDeletereal heart touching poem mam wll done.. god gives u more...
ReplyDeletenice.doc
ReplyDeleteJust,...read your posts,..views,...awesome,..realistic....carry on,..
ReplyDeleteDil ke antrang ko alfazon me utaar kar hi aagey baro.....God bless you