Saturday, November 19, 2016

***गुमनामीयो का शहर***

सुनो तुम...

इतनी तव्वजो मत दो हमें ..

गुमनामियों के शहर में

पाये जाते हैं...

हसते, बिखरते,रोते, गाते

बस वही रहबसर होते हैं ..

इतना पास न आना कि

खुद से दूरी बन जाए ..

हम अक्सर लोगो से दूर

खुद के करीब रहा करते हैं...

वक्त बहेगा तो समझ जाओगे

इन्ही गुमनामियों से

एक शहर हमने भी बनाया हैं ..

जहाँ कुछ वक्त हम

सबसे दूर खुद के साथ

बिता जाया करते हैं ...

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